ध्वज वंदन के साथ शताब्दी समारोह का भव्य शुभारंभ

Jay Prakash
5 Min Read

माताजी का जीवन त्याग, तप और साधना की अनुपम गाथा: श्री पुष्कर सिंह धामी
कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा: डॉ. चिन्मय पण्ड्या
विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण से: श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

हरिद्वार 18 जनवरी।
राजा दक्ष की नगरी कनखल के वैरागी द्वीप की भूमि पर जब शताब्दी ध्वज लहराया, तो मानो एक युग ने अपने गौरवशाली अतीत को नमन करते हुए नवसंकल्प लिया। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में आयोजित गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी व अखण्ड दीपक के शताब्दी समारोह का शुभारंभ ध्वज वंदन के साथ श्रद्धामय वातावरण में हुआ। यह आयोजन 23 जनवरी तक चलेगा।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह माताजी के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का साक्षात भावात्मक अभिव्यक्ति है। माताजी का संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को सही दिशा और नई दृष्टि दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता, यह उस युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की ओर अग्रसर करता है। मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पावन परिवेश में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।
शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है, बल्कि यह युगऋषि पूज्य आचार्यश्री का “खोया-पाया विभाग” है, जहाँ व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य किसी के द्वार पर खड़ा होकर प्रतीक्षा नहीं कर रहा, वरन् यह आयोजन स्वयं आपके सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए कहा कि “गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा। कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा।” उन्होंने जनसमूह से आत्मपरिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन की प्रथम शर्त बताते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करता है, तभी राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण की नींव सशक्त होती है। शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी इसी चेतना को जाग्रत करना है, ताकि विचार, आचरण और कर्म के स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव हो सके।
इस अवसर पर केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार के त्रिवेणी संगम यह शताब्दी समारोह नवयुग का निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है। जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। वहीं मंत्री स्वामी सतपाल महाराज, सुदर्शन न्यूज के प्रबंध निदेशक श्री सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक श्री राजेश्वर सिंह, श्री विनय रुहेला सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने विशिष्ट अतिथियों सहित न्यायाधीश श्री परविन्दर सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी सम्पूर्णानंद जी, स्वामी वेलु बापू जी,
श्री के नारायण राव, श्री रमेश भट्ट, श्री दिनेश काण्डपाल, आचार्य डॉ दयाशंकर विद्यालंकार, आदि को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष की माला तथा युग साहित्य आदि भेंट कर सम्मानित किया गया। यह क्षण श्रद्धा, ंस्कार और संकल्प का सजीव प्रतीक बन गया। इस अवसर पर हरिद्वार के प्रशासनिक अधिकारियों सहित अमेरिका, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों तथा भारत के कोने कोने से हजारों स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

Share This Article
Follow:
Jay Prakash : जयप्रकाश एक समर्पित और जिम्मेदार पत्रकार हैं, जिन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तराखंड से पत्रकारिता में परास्नातक (मास्टर डिग्री) की पढ़ाई की है। शैक्षणिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के संतुलन के साथ वे पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। समाज, सत्य और जनहित से जुड़े मुद्दों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर विश्लेषणात्मक लेखन तक, वे खबरों को सरल, सटीक और प्रभावशाली शब्दों में पाठकों तक पहुँचाने में विश्वास रखते हैं। सूचना को जिम्मेदारी के साथ समाज तक पहुँचाना और पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखना ही उनका मूल उद्देश्य है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *